पटियाला।
 कांग्रेस के पंजाब प्रदेशाध्यक्ष रह चुके राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू आज कोर्ट में सरेंडर करेंगे। कल उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत ने रोडरेज मामले में एक साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। अधिवक्ताओं के मुताबिक, सिद्धू का मामला पटियाला में दर्ज था, इसलिए वह पटियाला कोर्ट में सरेंडर करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि, कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें पटियाला जेल में ही भेजा जाएगा। हालांकि, वे किसी अन्य जेल में जाने का आवेदन भी सकते हैं। पंजाब की जेल में रहेंगे, 6 माह बाद मिलेगी पैरोल बता दें कि, कोर्ट ने सिद्धू के सरेंडर या गिरफ्तारी पर रोक के लिए राहत नहीं दी है। आज उनकी गिरफ्तारी के आॅर्डर भी जिला पुलिस को मिलने की उम्मीद है।

उसके बाद सिद्धू यदि पटियाला जेल में गए तो वहां उनका धुर-विरोधी शिअद नेता बिक्रम मजीठिया से सामना होगा। ये दोनों हाल ही में अमृतसर से विधानसभा चुनाव हारे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं कि, सिद्धू को पूरे 365 दिन की सजा भुगतनी पड़ेगी। वहीं, पैरोल के लिए कम से कम 6 महीने जेल भुगतनी होगी। उन्हें सश्रम कारावास की सजा हुई है, जिसका मतलब है कि जेल परिसर में कैदी को कड़ी मेहनत वाले काम जैसे रंग रोगन, बढ़ईगिरी, पत्थर तोड़ने, वेल्डिंग तय समय में करनी होती है। हालांकि, सिद्धू को चक्की से अनाज पीसने का काम मिलने की बातें हो रही हैं।

महंगाई के खिलाफ रैली कर रहे थे, तभी आदेश आ गया नवजोत सिद्धू ने कल सुबह 11:10 बजे पटियाला में महंगाई के खिलाफ रैली की थी। उन्होंने 1:52 बजे सोशल मीडिया पर रैली की तस्वीर पोस्ट की थी। उसके महज 8 मिनट बाद (2 बजे) सुप्रीम कोर्ट ने 34 साल पुराने रोडरेज केस में उन्हें एक साल कैद की सजा सुना दी। यह सजा उन्हें 1988 के रोडरेज मामले में सुनाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 दिसंबर 1988 को सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर की पटियाला में कार पार्किंग को लेकर 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से कहासुनी हो गई थी। जहां सिद्धू ने गुरनाम में घूंसा मार दिया था। जिससे गुरनाम की मौत हो गई थी। उस समय सिद्धू की उम्र 24 साल थी।

सजा सुनाए जाने के बाद सिद्धू की पहली प्रति​क्रिया, 'नो कमेंट' बोले, फिर ट्वीट किया- कानून का पालन करूंगा यह है रोडरेज का मामला सिद्धू के खिलाफ यह मामला कई साल तक ठंडे बस्ते में रहा। वर्ष 2006 में उनकी मुश्किलें तब बढ़ीं, जब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी माना। सिद्धू को 3 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2018 को इस फैसले को बदलते हुए 1 हजार रुपए जुर्माना लगाया। इस फैसले के खिलाफ मृतक के परिजनों ने पुनर्विचार एवं समीक्षा याचिका दी। और, अब उसी 34 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि, सिद्धू 1 साल की सश्रम कारावास की सजा भुगतेंगे।
 

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