चंडीगढ़

पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री को तो बदल दिया, लेकिन कैबिनेट को लेकर अभी भी जिच जारी है। राज्य के नए-नवेले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी चंडीगढ़ से दिल्ली आकर कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अपनी कैबिनेट को अंतिम स्वरूप देने में सफल नहीं हुए हैं। आधा दर्जन नए चेहरों को शामिल करने की बात के बीच कांग्रेस आलाकमान ने शुक्रवार को मंत्रालय को अंतिम रूप देने के लिए चन्नी के साथ दिल्ली में एक और दौर की बातचीत की।

आपको बता दें कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के साथ कई बैठकों के बाद, राष्ट्रीय राजधानी से चंडीगढ़ पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चन्नी को फिर चर्चा के लिए दिल्ली बुला लिया गया। आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री की दिल्ली की यह तीसरी यात्रा है।

सूत्रों ने बताया कि चन्नी और पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच पंजाब मंत्रिमंडल में मंत्रियों के नाम तय करने को लेकर चली चर्चा के बाद सामने आया कि पिछली अमरिंदर सिंह सरकार के कुछ मंत्रियों को छुट्टी लगभग तय है. कहा जा रहा है कि अमरिंदर सिंह बेहद खास गुरप्रीत सिंह कांगड़, राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी (खेल मंत्री) और साधु सिंह धर्मसोत (सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री) को कैबिनेट से हटाया जा सकता है.

चन्नी मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे देखने की संभावना है. इस रेस में ब्रह्म मोहिन्दरा, राणा गुरजीत, मनप्रीत बादल, तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया ,अरुणा चौधरी, रजिया सुल्ताना, डॉ. राज कुमार वेरका, भारत भूषण आशु, विजय इंदर सिंगला, गुरकीरत कोटली, राजा वरिंग, संगत सिंह गिलजियां, काका रणदीप सिंह,परगट सिंह, कुलजीत सिंह नागरा हैं. सिद्धू के करीबी माने जाने वाले परगट सिंह फिलहाल पंजाब कांग्रेस के महासचिव हैं और गिलजियान पार्टी की प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.

राहुल गांधी से मिले जाखड़

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ के बारे में पता चला कि उन्होंने भी राहुल गांधी से मुलाकात की है. अब ऐसी अटकलें हैं कि जाखड़, जो अमरिंदर सिंह के बाद सीएम की रेस में थे उन्हें भी किसी बड़े पद से नवाजा जा सकता है.

बता दें कि जाखड़ कांग्रेस विधायक दल के नेता पद के लिए सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन अंबिका सोनी सहित पार्टी के तमाम नेताओं ने सुझाव दिया कि एक सिख को राज्य में शीर्ष पद पर होना चाहिए, जिसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगी थी.

 

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