कांकेर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बीते ढाई सालों में वनवासियों एवं लघु वनोपज संग्राहकों के जीवन में बदलाव लाने के क्रांतिकारी फैसलों ने औने-पौने दाम में बिकने वाले लघु वनोपज को अब मूल्यवान बना दिया है, जिसका सीधा लाभ यहां के वनोपज संग्राहकों को मिलने लगा है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ राज्य आज लघु वनोपज के संग्रहण के मामले में देश का अव्वल राज्य बन गया है। देश का 73 प्रतिशत वनोपज क्रय कर छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ देश का एक मात्र राज्य है, जहां 52 प्रकार के लघु वनोपज को समर्थन मूल्य पर क्रय किया जा रहा है, इससे वनवासियों  एवं वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। कांकेर जिले में ईमली, महुआ, टोरा, चिरौंजी, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, हर्रा, बेहड़ा, सालबीज, कचरिया  इत्यादि लघु वनोपज का संग्रहण किया जाता है।

लघु वनोपज की खरीदी महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से किया जा रहा है, इससे संग्राहकों के साथ-साथ महिला स्व-सहायता समूह को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। कांकेर जिले में वर्ष 2019 से 2021 तक 06 लाख 42 हजार 589 क्विंटल लघु वनोपज की खरीदी की गई है,  जिसके लिए संग्राहकों को 18 करोड़ 55 लाख 77 हजार रुपए का भुगतान किया गया है। इसी अवधि में सरकार द्वारा कांकेर जिले में 05 लाख  95 हजार 661 मानक बोरा तेंदूपत्ता की खरीदी 04 हजार प्रति मानक बोरा की दर से खरीदा गया, जिसके लिए संग्राहकों को 02 अरब 38 करोड़ 26 लाख 49 हजार रुपए का भुगतान किया गया है।

Source : Agency